बस्तर दशहरा को साधना करते हैं जोगी..

बस्तर दशहरा में 14 से अधिक पूजा विधान संपन्न होते हैं

बस्तर दशहरा लगभग 600 वर्षों से मनाया जा रहा है

जगदलपुर।

विश्व प्रसिद्ध पुस्तक दशा निर्विघ्न संपन्न हो इसलिए बस्तर ब्लॉक के बड़े आमाबाल का एक हलवा परिवार लगभग 400 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी 9 दिन निराहार रहकर साधना करता आ रहा है।

इस वर्ष जोगी बनने का सौभाग्य 22 वर्षीय रघुनाथ नाक को मिला है बस्तर दशहरा पूजा विधान के तहत गुरुवार की शाम वह सिरसार भवन के में स्थित एक गड्ढे में साधना में बैठगा।

बताया जा रहा है कि बड़े आमाबाल का एक परिवार भक्ति के चलते राजा द्वारा आयोजित विशाल बस्तर दशहरा निर्विघ्न संपन्न हो इस भावना के साथ स्वयं ही एक गड्ढा खोदकर साधना में बैठ गया तब से बड़े आमाबाल का उक्त हलवा परिवार पहले बस्तर में अब जगदलपुर के सिरसार भवन में साधना में बैठता आ रहा है।

इसके पूर्व यह परंपरा अनुसार एक बकरा और साथ मांगुर मछली की बलि दी जाती है इस वर्ष रघुनाथ नाग जोगी बन साधना पर बैठेंगे इसके पूर्व इसी परिवार की भगत नाग 10 वर्षों तक और उनके पिता कपिल नाग 20 वर्षों तक प्रतिवर्ष समाधि पर बैठते रहे हैं।

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