नवरात्रि व्रत का समापन कन्या पूजन के साथ
जगदलपुर -- नवरात्रि के व्रत का समापन अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन से किया जाता है मान्यता है कि माता रानी कन्या पूजन से जितना प्रसन्न होती है इतनी प्रसन्नता उन्हें हवन और दान से भी नहीं होती। शास्त्रों में कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है मान्यता है कि कन्या पूजन के बगैर नवरात्रि का व्रत पूरा नहीं होता कन्या पूजन के दौरान नौ कन्याओं को माता के नौ स्वरूप मानकर पूजा की जाती है उसके साथ ही एक बालक को भी भोज कराया जाता है। कन्या पूजन के लिए 2 से 10 साल तक की कन्याओं को श्रेष्ठ माना जाता है नौ कन्याओं को भोजन कराना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है लेकिन आप चाहें तो अपने सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं की संख्या घटा या बड़ा भी सकते हैं छोटे बालक को भी कन्याओं के साथ भोजन कराने का चलन है दरअसल इस बालक को भैरव बाबा का रूप माना जाता है।
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